Friday, June 5, 2020

अच्छाई

अच्छाई ही ईश्वर है। जैसे गांधी ने कहा था सत्य ईश्वर है। सत्य क्या है, इसपर बहस हो सकती है। अच्छाई पर भी बहस हो सकती है, फिर भी , हर मानव के मन में कोई न कोई आदर्श होता है, जिसे वह अच्छा मानता है, भले ही वह पूरी तरह उस आदर्श को अपने जीवन में उतार न सके। यह जो अच्छाई की सर्वव्यापी धारणा है, वही ईश्वर है। इस सृष्टि के मूल में वही है और चरम उद्देश्य भी वही है—— इसलिए वह ईश्वर है। हम अपने जीवन में जिस सीमा तक अच्छाई का वरण कर सकते हैं, उसी सीमा तक हमारे जीवन में ईश्वर का आगमन होता है।


राजीव